Friday, June 14, 2019

Вратаря сборной России могут арестовать за дебош во Внуково

А у нас тут набедокурил очередной российский футболист. На этот раз - партнер Александра Кокорина по питерскому «Зениту», вратарь Андрей Лунев.

Голкипер сегодня должен был вернуться в Санкт-Петербург после матчей сборной России. Тренерский штаб вызывал его на игры против Сан-Марино (9:0) и Кипра (1:0), но на поле так и не выпустил. Оба матча Андрей Лунев провёл на скамейке запасных. Видимо, после этого позволил себе немного расслабиться.

К вылету в Питер, как говорят, футболист явился "немного выпимши". По словам очевидцев, на стойке регистрации Лунев вдруг начал вести себя вызывающе. Громко хамил сотрудникам аэропорта, ругался матом. Его предупредили, что если общение продолжится в таком же тоне, трансфер из Москвы в Северную столицу самолетом авиакомпании «Россия» попросту не состоится. Лунева эта фраза ещё больше вывела из себя.

В Управлении на транспорте МВД России по ЦФО личность дебошира не раскрывают, но рассказывают, что было с несостоявшимся пассажиром дальше:

- Сотрудники транспортной полиции доставили гражданина в дежурную часть линподразделения. В отношении мужчины был составлен протокол об административном правонарушении по статье «Мелкое хулиганство» Кодекса об административных правонарушениях.

Теперь Андрею Луневу грозит штраф до 1 тысячи рублей или административный арест до 15 суток. Наказание в ближайшее время должен определить суд.

Отметим, что завтра в Мосгорсуде будут разбирать апелляцию по приговору двум товарищам Лунева - футболистам Александру Кокорину и Павлу Мамаеву. Несколько недель назад суд дал за хулиганство и побои первому полтора года колонии, второму - 1 год и 5 месяцев.

Вратарь питерского "Зенита" Андрей Лунев вернулся в Санкт-Петербург после матчей сборной России другим рейсом. Дебош во Внуково закончился для него мизерным штрафом и утратой нескольких нервных клеток (подробности)

Wednesday, May 29, 2019

बेनामी लेन-देन के दावे पर कमलनाथ ने कहा- इसका सूत्र क्या है? भाजपा ध्यान भटकाना चाहती है

भोपाल.  लोकसभा चुनाव से पहले सीएम कमलनाथ के करीबियों पर मारे गए आयकर छापों में नया दावा किया गया है। तुगलक रोड स्थित निवास से हुए फोन की रिकॉर्डिंग और बातचीत के अंश मीडिया में बाहर आए हैं, जिसमें कथित तौर पर पैसों के कलेक्शन और ट्रांसफर के लेन-देन का जिक्र है। दावा किया जा रहा है कि रिकॉर्डेड बातचीत आयकर विभाग के पास मौजूद दस्तावेजों पर आधारित है। कहा जा रहा है कि यह मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके ओएसडी प्रवीण कक्कड़ के बीच हुई बातचीत से जुड़ी है। उधर, कमलनाथ ने कहा कि इस खुलासे के सूत्र क्या हैं? दस्तावेज कहां से मिले? उन्होंने कहा कि भाजपा बस हमारे अच्छे कामों से ध्यान भटकाना चाहती है।

भाजपा के दिल-दिमाग में क्या है, सब सामने आएगा- कमलनाथ
कमलनाथ ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर सभी आरोपों को दरकिनार कर दिया। उन्होंने कहा- दस्तावेज और अकाउंट जिनका जिक्र किया जा रहा है, वे कहां से मिले? िजन लोगों के यहां से मिले मैंने उनका चेहरा तक कभी नहीं देखा। उनका मुझसे क्या संबंध है। हम पिछली भाजपा सरकार में हुए कई मामलों के खुलासे करने वाले हैं। आने वाले दिनों में भाजपा के दिल-दिमाग में क्या है, सबके सामने होगा। इसीलिए भाजपा केवल ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।

उम्मीदवारों को करोड़ों की रकम भेजने के दस्तावेज
रिकाॅर्डेड बातचीत को लेकर यह दावा भी किया गया है कि यह आयकर विभाग के पास मौजूद दस्तावेजों पर आधारित है। यह  इसके साथ ही लोकसभा चुनाव के दौरान उम्मीदवारों को करोड़ों की रकम भेजने के सबूत भी दस्तावेजों में हैं। खबर जारी करने वाले निजी टीवी चैनल टाइम्स नाऊ ने मुख्यमंत्री और उनके ओएसडी के बीच हुई बातचीत को ट्वीट भी किया है।

कांग्रेस प्रत्याशियों को करोड़ों भेजे

आयकर विभाग की जांच और उसके दस्तावेजों के आधार मीडिया रिपोर्ट में यह दावा भी किया गया है कि लोकसभा चुनाव में 11 प्रत्याशियों को 25 लाख रुपए से लेकर 50 लाख रुपए तक मोटी रकम भेजी गई। सीबीआई के पास चुनाव आयोग की ओर से डीओपीटी को भेजे गए दस्तावेज पहुंचे हैं, जिनमें यह जिक्र है। जिन लोगों पर अप्रैल 2019 में आयकर छापा पड़ा था, उन्होंने ही इसे जुटाया था। आरके मिगलानी, प्रवीण कक्कड़ और ललित कुमार छजलानी के नामों का उल्लेख दस्तावेजों में है। इसमें आरोप है कि यह पैसा मप्र के उम्मीदवारों के पास आए हैं। इनमें कमलनाथ के पांच करीबी सहयोगी हैं। डायरी में एकाउंट और बयानों के साथ वाॅट्सएप चैटिंग के आधार पर पैसे के ट्रांसफर को पकड़ा गया है।
जांच रिपोर्ट का हवाला देकर यह भी कहा गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह इस सूची में शीर्ष पर हैं। जिन्हें चुनाव का फंड मिला है जो करीब 90 लाख रुपए है। जिन प्रत्याशियों के पास पैसा पहुंचने की बात कही गई है, उनमें मीनाक्षी नटराजन, कमल मरावी, अजय सिंह, प्रमिला सिंह, देवाशीष जरारिया, शैलेंद्र दीवान, कविता सिंह व प्रताप सिंह लोधी शामिल हैं। इन सभी ने हालांकि मीडिया रिपोर्ट के हवाले से आई जानकारी पर या तो टिप्पणी नहीं की या फिर इसे गलत बताया। मिगलानी का भी कहना है कि रिपोर्ट में किनके नाम हैं मैं उन्हें नहीं जानता।
आयकर दस्तावेजों में अलग-अलग विभागों से आए फंड का भी उल्लेख है। परिवहन से 54.45 करोड़, आबकारी से 36.62 करोड़, माइनिंग से 5.50 करोड़, पीडब्ल्यूडी से 5.20 करोड़ और सिंचाई विभाग से 4 करोड़ रुपए कलेक्शन किया गया। चेलानी की तरफ से एआईसीसी को 17 करोड़ रुपए भेजे जाने का भी उल्लेख मीडिया रिपोर्ट्स में किया गया है। चेलानी के कंप्यूटर से जानकारी सामने आई है। 
कथित बातचीत के अंश

सीएम- जो मैंने कहा था कि भेज दीजिए इसको...या दिल्ली वाले को...हां, क्या नाम था प्रकाश?...वो अभी भेजा नहीं आपने।
ओएसडी- सर, प्रकाश से बात हो गई थी हिमांशु की। तो बोल रहा था कि मैं ले जाऊंगा।

सीएम- लेकिन तीन दिन में हिमांशु को भेजा नहीं आपने?
ओएसडी- नहीं सर, अभी हिमांशु के पास ही पड़ा है। अभी ट्रांसफर रुका है तो...आज चला जाएगा। सोमवार को। बाकी कल हिमांशु की प्रकाश से बात हो गई थी। प्रकाश ने कल के लिए बोला। अभी हिमांशु से बात हुई। उसने बोला..1.30 बजे प्रकाश आ रहे हैं।

सीएम- आप भेज दीजिए हिमांशु को।
ओएसडी- कल 10 भेजू या 5 भेजूं।

सीएम - 10 भेज दीजिए।
ओएसडी - ठीक है सर, कल 10 भेज देता हूं। 

सीएम - अभी तो पिछले 5-7 दिनों में तो नहीं भेजना न? हिमांशु को कुछ कहा
ओएसडी - नहीं सर, पिछले 10-12 दिन पहले मैंने भेजा है। 

सीएम - ठीक है, कल हिमांशु को बोलना तुम्हें लेटेस्ट स्टेटमेंट भेज दे।
ओएसडी - दूसरी बात हुई मोहित से, जेवी वाले डिपार्टमेंट का है कोई...वो वाला भी दो दिन में आ जाएगा। मोहित से बात हुई थी कि कल करवा दूंगा। हिमांशु का नंबर भेज रहा हूं।
सीएम - ठीक है।

ओएसडी - कल कुछ स्टेटमेंट भेज रहे हो। 
सीएम - हिमांशु वाला, करेक्ट..
सीएम - प्रवीण मैं सौरभ के साथ बैठा हूं जो कटनी से विधायक थे। कह रहे हैं कि माइनिंग वाले और ट्रांसपोर्ट वाले बीजेपी की मदद कर रहे हैं। मैंने सौरभ को कहा है कि वो नाम दे देगा, जिन्हें आपको टाइट करना है।
ओएसडी - बिलकुल सर।

सीएम - ये माइनिंग और ट्रांसपोर्ट वाले को कह दो कि अगर चुनाव वहां से हारेंगे तो आप अपना बोरिया बिस्तर बांध लेना?
ओएसडी - बिलकुल सौ फीसदी सर।

सीएम - कटनी में एेसा नहीं चलेगा। सौरभ से कहूंगा कि वो तुम्हें कोआर्डिनेट कर ले...इतना कह देना कि माइनिंग-ट्रांसपोर्ट के कारण हारते हैं। रिजल्ट लेकर आएं नहीं तो सामान पैक कर लें।
ओएसडी - मैसेज डाल दिया है कि 8 हुए हैं सर, उसके पास उतना ही है, बाकी हवाले वाले 2-3 दिनों से बंद हैं। अपने पास नेवेन्यू कंपनी का रेड्डी साब की तरफ से जो आएगा, जैसे भेजेंगे करा देंगें। आठ का आज करा देंगे।

गाजियाबाद में कमलनाथ के बेटे को हॉस्टल बनाने के लिए दी गई जमीन का आवंटन रद्द

कमलनाथ के बेटे नकुल की संस्था इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी (आईएमटी) को गाजियाबाद में हॉस्टल के लिए दी गई 10 हजार 841 वर्ग मीटर जमीन का आवंटन रद्द कर दिया गया है। नकुल संस्था के अध्यक्ष हैं। गाजियाबाद के भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी ने राजनगर सेक्टर 20 में आईएमटी परिसर के अंदर जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया था। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष कंचन वर्मा ने जांच समिति के फैसले पर मुहर लगाकर आवंटन रद्द किया। साथ ही प्रवर्तन अनुभाग को जमीन का कब्जा वापस लेने और हॉस्टल को तोड़ने के निर्देश जारी किए। मंगलवार को इस बारे में आईएमटी प्रबंधन को नोटिस जारी कर दिया गया।गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के सचिव, संतोष कुमार पांडेय ने कहा- "आईएमटी गाजियाबाद द्वारा किए गए अवैध निर्माण की जांच के बाद कुल 11 हजार 503 वर्ग फुट जमीन का आवंटन निरस्त कर दिया गया है। इस जमीन पर किया गया अवैध निर्माण हटाने के लिए आईएमटी प्रबंधन को 15 दिन का समय दिया गया है। यदि इस अवधि में उसने अवैध निर्माण खुद नहीं तोड़ा तो प्रशासन कार्रवाई कर इसे जमीदोज करेगा।"

Thursday, May 16, 2019

Полковника Захарченко потребовали посадить на 15,5 лет. У него нашли 8,5 млрд рублей наличными

Прокуратура попросила приговорить полковника Дмитрия Захарченко к 15,5 годам колонии строгого режима и штрафу в 494 млн рублей по обвинению в получении взяток. Захарченко - бывший сотрудник управления "Т" антикоррупционного главка МВД, во время задержания у него были найдены 8,5 миллиарда рублей наличными деньгами.

В зале суда присутствовали пять адвокатов Захарченко. Перед началом заседания они долго разговаривали с полковником, находящемся в "аквариуме". Один из адвокатов говорил Захарченко, что готовит жалобы в Европейский суд по правам человека.

"Где же победа?" - спросил Захарченко. "Вот документы, они обеспечат победу", - ответил ему адвокат.

"Хотя все для победы у нас есть. Вот журналисты сидят, они разве правду напишут?" - стал обращаться к залу Захарченко.

После этого он почему-то заговорил о деле футболистов Кокорина и Мамаева. "Надеюсь, Мамаев будет играть в Ростове. Передайте им мою поддержку", - сказал Захарченко журналистам.

В свою очередь прокурор Милана Дигаева, обращаясь к судье, заявила, что обвинения, выдвинутые в адрес Захарченко, нашли свое объективное подтверждение.

"Получение взятки считается одним из самых опасных должностных преступлений, так как дискредитирует и подрывает авторитет государства в глазах населения, - говорила обвинитель. - Захарченко, который должен был бороться с коррупцией, на деле занимался противоположным и в личных интересах имитировал эту борьбу".

Во время своего выступления прокурор зачитывала показания одного из свидетелей, который рассказывал, как Захарченко якобы вымогал у него взятку. В это время Захарченко обратился к судебному приставу и указал на служебную собаку, которая легла на пол. "Устала это слушать", - сказал Захарченко.

В итоге представитель прокуратур попросила приговорить Захарченко к реальным тюремным срокам по нескольким пунктам обвинения. Общий срок заключения, по мнению прокуратуры, путем частичного сложения наказаний должен составить 15,5 лет.

После заседания Захарченко заявил, что прокурор якобы искажала слова свидетелей и вырывала куски их речи во время чтения их показаний. "Даже собака высказывала своё возмущение", - считает он. Обвинение Захарченко назвал голословным.

Также бывший полицейский утверждает, что ему предлагали дать признательные показания и получить шесть-восемь лет колонии, но он отказался. Ни следствие, ни прокуратура это заявление Захарченко пока не прокомментировали.

Дмитрий Захарченко находится под арестом с сентября 2016 года, его обвиняют в получении взяток и препятствовании осуществления правосудию.

Во время задержания у Захарченко дома было обнаружено 8,5 млрд рублей наличными. Также выяснилось, что он владеет 13 квартирами в Москве, 14 машино-местами и четырьмя дорогостоящими автомобилями.

Захарченко говорил, что это имущество заработали его отец и сестра, занимаясь строительством и сельским хозяйством. Защита Захарченко утверждает, что найденные при обыске деньги подкинули.

Прокуратура рассказала в суде, что при обыске также была найдена школьная тетрадь, в которой мать Захарченко якобы вела учет средств, которые хранились в квартире.

Обыски также прошли и у сестры Полковника. У нее дома были найдены 124 миллиона долларов, 1,4 миллиона евро, 342 миллиона рублей и золотой слиток весом 500 граммов.

В августе 2018 года деньги Захарченко были изъяты в пользу государства.

В апреле 2019 года отца полицейского Виктора Захарченко приговорили к четырем годам колонии общего режима и штрафу в 800 тысяч рублей за растрату средств банка "Московское ипотечное агентство" (МИА).

Отца Захарченко обвинили в том, что он фиктивно работал в банке МИА на должности вице-президента и получал зарплату в размере 150 тысяч рублей в месяц. Общая сумма растраты, по версии следствия, составила 4,5 миллиона рублей. Ущерб Захарченко возместил.

Friday, May 3, 2019

Unerwarteter Ärger mit dem Eigenheim

Krach um 600 000 Franken Anschlussgebühren nach BaZ-Recherchen beigelegt – Therwil will Reglement revidieren

Therwil. Es geht um viel Geld, ungenaue Verträge, Reglemente, die willkürlich wirken und am Rande auch um die umstrittene Scientology-Kirche.

Zunächst begann alles in Minne. Die Firma Swiss Immo Trust baute von 2013 bis 2014 an guter Lage in Therwil die schmucke Überbauung Untere Mühle mit 26 Eigentumswohnungen. Doch die Freude an den Eigentumswohnungen verging den Bewohnern in den letzten sechs Monaten – nicht aufgrund der Wohnungen an sich, sondern weil plötzlich Forderungen von insgesamt 600 000 Franken im Raum stehen, mit denen die Stockwerkeigentümer nicht gerechnet haben und die für einige von ihnen kaum aufzubringen sind.

Hickhack um Zahlung
Bei dem Betrag handelt es sich um die Anschlussgebühren an die Kanalisation und Wasserversorgung der Gemeinde Therwil. Für die Stockwerkeigentümer ist klar: Diese Gebühren muss der ehemalige Bauherr Swiss Immo Trust bezahlen, denn die Eigentumswohnungen wurden im Zustand «schlüsselfertig» oder «wie besichtigt» verkauft, was auch ein funktionsfähiges Kanalisationssystem mit einschliesse. Eine Einschätzung, die auf Anfrage der BaZ auch der Advokat und Vizepräsident des Hauseigentümerverbandes Baselland, Alexander Heinzelmann, teilt: «Falls nichts Gegenteiliges im Vertrag oder in zusätzlichen, integrierten Vereinbarungen steht, dürfen die Käufer davon ausgehen, dass die Anschlussgebüren im Kaufpreis inbegriffen sind.»

Die Swiss Immo Trust machte jedoch monatelang keine konkreten Anstalten, die Rechnung der Gemeinde zu übernehmen. Glaubt man Simon von Fürstenhaus*, einem der Eigentümer, macht die Firma im Gegenteil Druck: «Zunächst sagten sie uns, dass sie nicht zahlen. Später hiess es dann, dass sie für einen Deal bereit sind, wenn wir auf unseren Anwalt verzichten. Und zu guter Letzt sind sie zu mir nach Hause gekommen und haben mir angeboten, die Gebühren zu übernehmen, falls ich ihnen ein Darlehen von 200 000 bis 350 000 Franken gebe», sagt von Fürstenhaus.

Die Namen, die von Fürstenhaus in diesem Zusammenhang nennt, sind keine Unbekannten und mit der Scientology-Kirche Basel verbunden. Auch die Swiss Immo Trust taucht auf einer Beobachter-Liste der von aktiven Scientologen geführten Firmen auf. Dies, weil der frühere Verwaltungsrat der Swiss Immo Trust, Rudolf Flösser, leitender Direktor bei Scientology Basel ist. Seine Firma, die Dr. Flösser Treuhand GmbH, hat für das Projekt Untere Mühle auch die Bauherrenberatung übernommen.

«Ich habe an sich nichts gegen Scientology», sagt von Fürstenhaus, der eine Hexenjagd gegen Scientology vermeiden will. Das Verhalten der Swiss Immo Trust in den letzten Monaten findet er trotzdem nicht okay und hat sich deshalb an die BaZ gewandt. Mit Erfolg: Was lange nicht möglich schien, war nach einer Anfrage der BaZ innerhalb eines Tages machbar – die Stockwerkeigentümer haben die schriftliche Bestätigung erhalten, dass Swiss Immo Trust die Gebühren übernimmt.

Christian Varga, Verwaltungsrat der Swiss Immo Trust, bestreitet, dass er die Übernahme der Gebühren je mit der Verleihung eines Darlehens verknüpft hat. Obwohl die Swiss Immo Trust die Gebühren nun übernimmt, ist er nach wie vor der Meinung, dass diese im Preis der Wohnung nicht mit eingeschlossen waren: «Die Kanalisations- und Anschlussbeiträge waren gemäss Vertrag von den Käufern zu tragen. Da jedoch üblicherweise die Kanalisations- und Anschlussbeiträge im Kaufpreis inbegriffen sind, haben wir uns aus Kulanzgründen bereit erklärt, diese Kosten zu übernehmen.» Dies habe er den Käufern im Februar mündlich mitgeteilt: «Wir hätten dies damals schriftlich machen können statt lediglich mündlich, um Klarheit zu schaffen», erklärte Varga.

Unangenehme Situationen
Was Simon von Fürstenhaus fast noch mehr ärgert als das Verhalten von Swiss Immo Trust, ist, dass die Gemeinde die Rechnung, in Kenntnis der Fakten, trotzdem an die Stockwerkeigentümer senden wollte. «Nur aufgrund eines willkürlichen Gummi-Reglements konnte es überhaupt zu dieser unangenehmen Situation kommen.» Das Abwasserreglement der Gemeinde besagt, dass bei Neubauten das Datum der Endschätzung des Gebäudes durch die kantonale Gebäudeversicherung Stichdatum für die Beitragspflicht ist. Auf den Termin der Schätzung haben Gemeinde, Verkäufer und Käufer kaum Einfluss. Im Fall der Unteren Mühle führte dieses Stichdatum dazu, dass die Rechnung trotz schlüsselfertigem Kauf an die Stockwerkeigentümer ging.

«Dieses Reglement ist veraltet, das muss auch die Gemeinde sehen. Sie hätte sich in dieser Angelegenheit auf unsere Seite stellen müssen», sagt von Fürstenhaus enttäuscht.

Laut Gemeindeverwalter Theo Kim muss die Gemeinde die Rechnung dem zum Zeitpunkt der Rechnungsstellung im Grundbuch eingetragenen Eigentümer stellen – ausser der Verkäufer bestätigt der Gemeinde, dass er die Kosten übernimmt, was im Fall von Swiss Immo Trust bisher offenbar nicht der Fall war. Die Schwächen des 25-jährigen Reglements, das ähnlich auch in vielen anderen Gemeinden in Kraft ist, sieht er jedoch auch: «Wir haben bemerkt, dass es in Einzelfällen zu verzwickten und unangenehmen Situationen führen kann.

Es gab auch einen Fall, bei dem Käufer tatsächlich zweimal bezahlen mussten», sagt Kim. Deshalb soll das Reglement noch dieses Jahr revidiert und vor die Gemeindeversammlung gebracht werden: «Darin ist vorgesehen, dass die Rechnung zu einem früheren Zeitpunkt erfolgt, zu dem der Verkäufer im Normalfall noch der Besitzer ist.» Einen Fall wie jenen der Unteren Mühle gäbe es dann nicht mehr.

Tuesday, April 30, 2019

भारत पाकिस्तान सीमा: आख़िरी बूथ पर वोटिंग का आंखो देखा हाल

धूप में तपते रेत के टीलों की लम्बी क़तारें पार करते हुए हम जैसलमेर से कुल 150 किलोमीटर दूर राजस्थान के बाड़मेर लोकसभा क्षेत्र के आख़िरी गांव 'मुरार' पहुंचते हैं.

भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित इस आख़िरी गांव में ही मौजूद है थार रेगिस्तान के बीचों बीच खड़ा भारत का आख़िरी पोलिंग स्टेशन.

'न्यूटन' फ़िल्म की याद दिलाते हुए 6 निर्वाचन अधिकारियों की टीम आज चुनाव करवाने के लिए 'मुरार का तला प्राथमिक विद्यालय' नामक इस पोलिंग बूथ पर पहुंची.

बूथ इंचार्ज सत्यनारायण ने बीबीसी को बताया कि भारत-पाकिस्तान सीमा इस पोलिंग बूथ से मात्र 2 किलोमीटर दूर है.

आर्मी और बॉर्डर सेक्योरिटी फ़ोर्स (बीएसएफ़) से घिरे इस संवेदनशील क्षेत्र में सुबह 8 बजे से ही मतदाता वोट देने के लिए क़तार में खड़े थे.

इस बूथ तक पहुंचने के अपने अनुभव के बारे में बताते हुए निर्वाचन अधिकारी सत्यनारायण बताते हैं, "यह जैसलमेर का सबसे दूरस्थ पोलिंग बूथ ये है. कल सुबह जैसे ही हमको बताया गया की इस बार चुनाव में हमारी ड्यूटी इस बीहड़ में बॉर्डर के पास लगी है तो हमारे दिल में भी बहुत जिज्ञसा हुई. हम सोच में भी पड़ गए की बॉर्डर के सबसे पास का गांव आपको मिला है तो यहां पता नहीं कैसा माहौल होगा. लेकिन लोगों में उत्साह है और मतदान सभी नियम क़ानून के अनुसार हो रहा है."

मात्र 304 मतदाताओं के लिए खड़ा किया गया यह पोलिंग बूथ मुरार गांव के टूटे हुए प्राइमरी स्कूल में बना है.

इस बूथ पर 2012 के काम कर रहे निर्वाचन अधिकारी रामअवतार मीणा बताते हैं, "यहां इस पोलिंग बूथ के अंतर्गत 6 ढानियाँ (छोटे गांव) आती हैं. यहां की बहुत मुश्किल परिस्थितियां हैं. एक ढानी जो बूथ से 40 किलोमीटर दूर है तो दूसरी यहां से 60 किलोमीटर दूर है. लेकिन दूर दूर से मतदाता यहां वोटिंग करने के लिए आते हैं. उसी तरह चुनाव के पहले मैं भी उनसे मिलने के लिए दूर दूर तक जाता हूं और उन्हें वोट डालने जाने के लिए प्रोत्साहित करता हूं."

विषम परिस्थितियों के बीच मौजूद इस दूरस्थ पोलिंग स्टेशन पर अपना वोट डालने के लिए आज मतदाता सुबह 6 बजे से उठकर और फिर पैदल चलकर आए हैं.

कई मतदाताओं ने यहां मतदान करने के लिए 10-10 किलोमीटर का रेगिस्तान पैदल पार किया.

कर्मावली गांव के रहमान बताते हैं कि वो सूरज उगने से पहले ही वोट देने के लिए अपने ढानी से निकल पड़े थे.

वो कहते हैं, "मेरा गांव तो बारह किलोमीटर दूरी है लेकिन मैं हर बार वोट डालने के लिए यहां आता हूं. घड़ी तो नहीं देखी लेकिन आज सुबह भी सूरज उगने से पहले ही घर से निकला पड़ा और पैदल पैदल रेगिस्तान पार करते हुए अब यहां आ पहुंचा हूं."

वहीं अपने गांव के साथियों के साथ कुछ दूरी पर रेत में बैठे फतेह ख़ान वोट देने के बाद सुस्ता रहे थे.

पूछने पर वह कहते हैं, "सुबह से चलते चलते थक गया हूं. वोट देने आने के लिए मुझे बहुत दूर तक चलना पड़ा. यहां सभी लोग बहुत दूर दूर से आते हैं. कुछ लोग जीप किराए पर लेकर आते हैं तो कुछ मेरी तरह पैदल...क्योंकि यहां रास्ते नहीं हैं और आने जाने के लिए रेत में गाड़ी का साधन भी नहीं है."

"लेकिन वोट डालना ज़रूरी है इसलिए हम आते हैं. क्योंकि अगर हम अपना नेता ख़ुद चुनकर नहीं भेजेंगे तो कल को बिजली-पानी से जुड़े अपने काम किससे करवाएंगे?"

तपते रेगिस्तान में मात्र 304 मतदाताओं के लिए खड़ा यह पोलिंग बूथ इस बात की गवाही देता है की भारतीय लोकतंत्र में इस सबसे बड़े त्योहार में देश के हाशिए पर रहने वाले आख़िरी भारतीय नागरिक के वोट के क़ीमत भी बाक़ी देशवासियों के वोटों के बराबर है.

Thursday, April 4, 2019

नोटबंदी वाले वित्त वर्ष में 88 लाख टैक्सपेयर्स ने नहीं फाइल किया था रिटर्न! क्या है माजरा

नोटबंदी वाले वित्त वर्ष 2016-17 में 88.04 लाख टैक्सपेयर्स ने इनकम टैक्स रिटर्न नहीं दाखिल किया था. यह इसके पिछले वित्त वर्ष 2015-16 में 8.56 लाख रिटर्न न फाइल करने वाले टैक्सपेयर्स की तुलना में दस गुना ज्यादा है. कर अधिकारियों के मुताबिक साल 2000-01 के बाद पिछले करीब दो दशकों में यह सबसे ज्यादा डिफाल्ट है. 

हालांकि, इसके पि‍छले वर्षों में टैक्स रिटर्न फाइल न करने वालों की संख्या लगातार घटी है. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार वित्त वर्ष 2013 में ऐसे 37.54 लाख डिफाल्टर की तुलना में वित्त वर्ष 2014 में 27.02 लाख, वित्त वर्ष 2015 में 16.32 लाख और वित्त वर्ष 2016 में 8.56 लाख रही. इनकम टैक्स विभाग के कुछ अध‍िकारियों ने स्वीकार किया कि नोटबंदी के बाद आर्थिक गतिविधियों में कमी की वजह से लोगों की नौकरियां चले जाने और आय में गिरावट की वजह से संभवत: इनकम टैक्स रिटर्न में कमी आई है.

एक टैक्स अधिकारी ने बताया, 'रिटर्न दाखिल करने वालों की कमी से पता चलता है कि अनुपालन और इसे लागू करने में कहीं खाई है. कर अधिकारी इसे लागू करने में विफल रहे हैं. लेकिन 2016-17 में रिटर्न फाइल न करने वालों की भारी संख्या को अनुपालन की आदत में किसी बड़े बदलाव की वजह से नहीं माना जा सकता. यह भारी उछाल उस साल लोगों की आय और नौकरियां घटने की वजह से हो सकता है.

कर आंकड़ों के मुताबिक 2016-17 में टीडीएस कटाने वालों की संख्या में भी 33 लाख तक की भारी कमी आई है. इससे भी पता चलता है कि पिछले वर्षों में ऐसे ट्रांजैक्शन करने वाले लोगों ने नोटबंदी वाले वर्ष में कामकाज नहीं किया.

सीबीडीटी के अनुसार 1.75 करोड़ से ज्यादा ऐसे लोग हैं जिनका टीडीएस/टीसीएस तो कटता है, लेकिन वे इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं करते. ऐसे ज्यादातर लोग ऐसे हैं जिनकी आय टैक्स के दायरे में नहीं आती. अधिकारियों का यह भी कहना है कि साल 2016 में टैक्स बेस, टैक्स्पेयर, न्यू टैक्सपेयर आदि की परिभाषा में केंद्रीय प्रत्यक्ष बोर्ड द्वारा कुछ बदलाव किए गए थे और इसी वजह से साल 2016-17 में टैक्सपेयर बेस में 25 फीसदी का उछाल आया था.

इसके पिछले तीन साल में भी टैक्सपेयर बेस में सालाना करीब 18 फीसदी की बढ़त हुई थी. अप्रैल 2016 में सीबीडीटी ने टैक्सपेयर की परिभाषा बदलते हुए उन लोगों को भी टैक्सपेयर बेस में शामिल कर लिया था जो वित्त वर्ष  के दौरान टीडीएस या टीसीएस (टैक्स कलेक्टेड ऐट सोर्स) के द्वारा कर का भुगतान कर चुके हैं.

एक्टर अमिताभ बच्चन और बाहुबली एक्ट्रेस राम्या कृष्णन एक साथ फिर पर्दे पर नजर आने वाले है. दोनों फिल्म Uyarntha Manithan में साथ नजर आएंगे. अमिताभ पहली बार किसी तमिल फिल्म में काम करते दिखेंगे. Tamilvaanan इस फिल्म को डायरेक्ट कर रहे हैं. ये फिल्म हिंदी भाषा में भी आएगी. फिल्म के कुछ हिस्सों की शूटिंग मुंबई में चल रही है. ऐसी भी खबरें हैं कि दोनों स्क्रीन पर रोमांस करते नजर आएंगे.

बता दें कि इससे पहले दोनों अमिताभ बच्चन और राम्या फिल्म छोटे मियां और बड़े मियां में नजर आए थे. ये फिल्म 1998 में रिलीज हुई थी. फिल्म में दोनों की एक्टिंग को सराहा गया था. फिल्म में गोविंदा और रवीना टंडन भी अहम रोल में थे.

आईएएनएस से बातचीत में निर्देशक ने बताया, "राम्या मैम को अमित जी के साथ पेयर किया गया है. ऑडियंस दोनों को दिलचस्प भूमिकाओं में देखेंगी. इस तरह के बेहतरीन कैलिबर वाले एक्टर्स को एक साथ लाना और उनके साथ काम करना वास्तव में रोमांचक है. वर्तमान में हम मुंबई में शूटिंग कर रहे हैं."

इस फिल्म में मुख्य किरदार निभा रहे अभिनेता-फिल्मकार एसजे सूर्या ने अपने ट्विटर अकाउंट पर अमिताभ का लुक शेयर किया. अमिताभ बच्चन ने भी ट्विटर पर फिल्म में अपना लुक शेयर किया है. लुक में अमिताभ धोती-कुर्ता पहने नजर आए. साथ ही उन्होंने गले में गमछा भी डाला हुआ था.

वर्कफ्रंट की बात करें तो राम्‍या बाहुबली जैसी हिट फिल्म दे चुकी हैं. इसके अलावा तमिल सिनेमा में वो खास जगह बना चुकी हैं. वहीं अमिताभ बच्चन हाल ही में फिल्म बदला नजर आए थे. बदला, बॉक्स ऑफिस पर काफी सफल साबित हुई है. इसमें तापसी पन्नू उनके अपोजिट रोल में थीं. फिल्म में अमृता सिंह भी अहम किरदार में नजर आई थीं.

Thursday, March 14, 2019

艺术大师的幽默 八个隐藏在杰作中的古怪细节

从《戴珍珠耳环的少女》(Girl with a Pearl Earring)到毕加索的《格尔尼卡》(Guernica),从兵马俑到蒙克(Edvard Munch)的《呐喊》(The Scream),文化史上最杰出的画作和雕像,有什么共同点呢?共同点就是,每一个艺术作品中,都有许多被大大低估、乃至被无视的表达深层含义的细节。我的新书《全新的欣赏角度:57件作品体现的艺术史》(A New Way of Seeing: The History of Art in 57 Works)就是以此为前提的。书中我进行了一项研究,希望读者能够重新审视这些早已熟悉但又不知其深意的著名艺术作品。

从图拉真圆柱(Trajan's Column)到美国的哥特式建筑,从埃尔金大理石雕(Elgin Marbles)到马蒂斯(Matisse)的《舞蹈》(The Dance),我试图在保存最好的人类艺术史画卷中找寻一个切入点——是什么成就了艺术的伟大?为什么有的作品能够在多个世纪之后还能引发人类共鸣,而对于大多数艺术创作,人们却是看过就忘记了。在梳理这些伟大的创作之时,我惊喜地发现,几乎所有的巨作,都有奇异之处。一旦我们注意到这些点,就会对作品产生新的、令人兴奋的解读,有时候会永久改变我们的看法。

例如蒙娜丽莎不安的右手手指、卡萝(Frida Kahlo)最为闻名于世的自画像,主人公眼神里象征刚毅的塔罗符号等……随着名画中这些细节的展露,我不禁想起法国诗人、评论家波德莱尔(Charles Baudelaire)的一句话。1859年,他写道:“美丽总是让人有疏离感、简单纯粹、不矫揉造作,还有着一丝若隐若现的奇异感。”

千年前,有一群被后人遗忘的女性在70米长的布料上进行刺绣。贝叶挂毯上,她们一同绣下了引发诺曼征服(Norman Conquest)的导火索。这些女红们绣活出众,将故事和针线精巧地织在了一起。故事在高潮中收尾,刺穿国王哈罗德眼睛的箭矢更是让挂毯的叙事功能事半功倍。受伤的国王一把抓住箭头,后续的故事场景随着他的视线推进,此时他的形象被分割成了两部分,艺术家和观察者。我们的眼睛、哈罗德的眼睛、还有女工们的绣花针,被一针一针地结合在了一起。

波提切利的《维纳斯的诞生》堪称文艺复兴时期的杰作。画中有一个金发女神,右肩上挂着一缕被风吹卷了的头发。这缕金发像是一个微型马达,整幅作品以之为轴不断旋转,让我们看画时陷入想象之中。这缕头发呈对数卷曲,绝不是偶然添加的装饰、或是笔触的意外。同样的曲线,还出现在猛禽的骤降和鹦鹉螺的壳面上,自古以来就有不少人为之着迷。17世纪时,瑞士数学家伯努利(Jacob Bernoulli)将之命名为奇迹螺旋(mirabilis)。在波提切利的作品毫无疑问颂扬了永恒的优雅,画中卷发上神秘的螺旋对着维纳斯的右耳轻声诉说,向她透露着真理和美丽的秘密。

波希的《人间乐园》无疑是一副充满肉体的恶作剧狂欢,视线正中有一个鸡蛋(稳稳立在骑士的头顶上)。这个细节没有人不知道的,不论是批评家还是普通爱画之人。但是,这个精妙的细节又是如何展现作品真正的含义的呢?如果我们先抛开左右两侧的联画不谈,剖开画作的表象,即波希描绘的那个精致的世界后——每一次看这幅画,我们都能感受到他在画作中构想的世界就像一个不断被敲开而又不断合拢的蛋壳,有一个半透明的球体在两者之间徘徊。《人间乐园》开开合合,我们感受到的则是一个刚刚萌芽、不断变化的世界,仿佛被带回了创始之初,人类尚有童贞之时。

中国赴俄医疗专家组与俄罗斯医生分享抗疫经验

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