Monday, December 24, 2018

इन्फोसिस के शेयर 2% तक चढ़े, 11 हजार करोड़ रु. के शेयर बायबैक कर सकती है कंपनी

आईटी कंपनी इन्फोसिस के शेयर में सोमवार को 2% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इन्फोसिस के एक शेयर की कीमत 659 रु. तक पहुंच गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शेयरों में बढ़ोतरी के बाद आईटी कंपनी 11200 करोड़ रुपए के शेयर बायबैक कर सकती है। इन्फोसिस की मार्केट कैप अभी 2.84 लाख करोड़ रुपए है।

इन्फोसिस ने 2017 में भी शेयर बायबैक किया था
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन्फोसिस शेयरों के मौजूदा रेट से 20-25 फीसदी के प्रीमियम पर शेयर बायबैक कर सकती है। 11 जनवरी को होने वाली बोर्ड की बैठक में इसका ऐलान किया जा सकता है। हालांकि, इन्फोसिस ने इस बारे में पूछे गए सवाल का कोई जवाब नहीं दिया है।

अगर इन्फोसिस शेयर बायबैक करती है तो यह कंपनी का दूसरा बायबैक होगा। इससे पहले इन्फोसिस ने 2017 में 1.13 करोड़ शेयर बायबैक करे थे।

30 नवंबर से 14 दिसंबर 2017 तक चली इस बायबैक प्रक्रिया में एक शेयर की 1150 रुपए कीमत अदा की गई थी। यानी एक शेयर बेचने वाले को 1 शेयर का दाम अतिरिक्त दिया गया था।

इस बायबैक प्रोग्राम में एलआईसी, सिंगापुर सरकार, इन्फोसिस के को-फाउंडर एस गोपालकृष्णन की पत्नी सुधा गोपालकृष्णन, को-फाउंडर एनआर नारायणमूर्ति के बेटे रोहन मूर्ति शामिल हुए थे।

क्यों किया जाता है शेयर बायबैक
एक्सपर्ट का कहना है कि शेयर बायबैक से हर शेयर पर कमाई बेहतर होती है। इसके अलावा शेयर होल्डर को अतिरिक्त कैश वापस मिलता है। इसके अलावा यह प्रक्रिया ये मार्केट की धीमी रफ्तार के दौरान भी शेयर प्राइस को गिरने नहीं देती।

"कंपनी के लिए ये सकारात्मक कदम होता है। लॉन्ग टाइम इन्वेस्टर्स को इससे फायदा होता है। यह निवेशकों के लिए टैक्स बचाने के उपकरण की तरह होता है। इसके अलावा यह शेयर होल्डर के लिए अच्छा मुनाफा कमाने का मौका भी होता है।"

Tuesday, December 11, 2018

इन वजहों से तेलंगाना में पूरे नहीं हुए कांग्रेस-बीजेपी के सपने

तेलंगाना राष्ट्रीय समिति (टीआरएस) ने राज्य के विधानसभा चुनाव में 88 सीटों के साथ ज़बरदस्त जीत हासिल की है.

राज्य में सात दिसंबर को चुनाव हुए थे, जिनमें टीआरएस को कांग्रेस के गठबंधन की ओर से कड़ी टक्कर मिलने की बात कही गई थी.

लेकिन मंगलवार को जब नतीजे आए तो टीआरएस के प्रमुख के चंद्रशेखर राव का जादू चलता दिखा.

राज्य विधानसभा को भंग कर समय से पहले चुनाव कराने का टीआरएस प्रमुख का फ़ैसला काम कर गया.

किसानों और दूसरे कमज़ोर तबकों के लिए लागू की गई कल्याणकारी योजनाओं ने केसीआर को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई.

ग्रामीण सीटों पर मिला फ़ायदा
टीआरएस पार्टी की जीत का श्रेय किसानों और ग्रामीण मतदाताओं को जाता है. तेलंगाना की ग्रामीण सीटों पर पार्टी को मिले वोट प्रतिशत से ये बात साफ दिखती है.

टीआरएस सरकार ने किसानों के लिए रैयत बंधु और रैयत भीम जैसी कल्याणकारी योजनाएं लागू कीं. इन योजनाओं के चलते केसीआर को किसानों के बीच काफी लोकप्रियता मिली.

इसके अलावा किसानों को 24 घंटे बिजली मुहैया कराना, मिशन काकटेय और कालेश्वरम जैसी बड़ी सिंचाई परियोजनाओं को लागू करना भी टीआरएस के लिए फायदेमंद साबित हुआ.

विधवाओं और बुज़ुर्गों को मिली सुविधाएं
सत्ताधारी टीआरएस पार्टी ने मिशन भागीरथ चलाकर घर-घर पीने का पानी मुहैया कराया. अपनी इस योजना से टीआरएस सरकार ने लोगों का विश्वास जीता. विधवाओं और बुज़ुर्गों के लिए पेंशन योजना ने भी टीआरएस की जीत में मदद की है.

हालांकि जनता टीआरएस के कई मौजूदा विधायकों से नाराज़ थी, लेकिन केसीआर ने उन लोगों को इस चुनाव में दोबारा सीटें दे दी थीं. लेकिन जब पार्टी को जिताने की बात आई तो जनता ने टीआरएस के लिए खुले दिल से वोट किया.

इन विधायकों के लिए लोगों का गुस्सा इतना ज़्यादा तो नहीं था कि पार्टी की हार का कारण बन जाए, लेकिन इससे पिछले विधानसभा चुनावों के मुकाबले इस बार बहुमत का प्रतिशत कम हुआ है.

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