Wednesday, May 29, 2019

बेनामी लेन-देन के दावे पर कमलनाथ ने कहा- इसका सूत्र क्या है? भाजपा ध्यान भटकाना चाहती है

भोपाल.  लोकसभा चुनाव से पहले सीएम कमलनाथ के करीबियों पर मारे गए आयकर छापों में नया दावा किया गया है। तुगलक रोड स्थित निवास से हुए फोन की रिकॉर्डिंग और बातचीत के अंश मीडिया में बाहर आए हैं, जिसमें कथित तौर पर पैसों के कलेक्शन और ट्रांसफर के लेन-देन का जिक्र है। दावा किया जा रहा है कि रिकॉर्डेड बातचीत आयकर विभाग के पास मौजूद दस्तावेजों पर आधारित है। कहा जा रहा है कि यह मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके ओएसडी प्रवीण कक्कड़ के बीच हुई बातचीत से जुड़ी है। उधर, कमलनाथ ने कहा कि इस खुलासे के सूत्र क्या हैं? दस्तावेज कहां से मिले? उन्होंने कहा कि भाजपा बस हमारे अच्छे कामों से ध्यान भटकाना चाहती है।

भाजपा के दिल-दिमाग में क्या है, सब सामने आएगा- कमलनाथ
कमलनाथ ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर सभी आरोपों को दरकिनार कर दिया। उन्होंने कहा- दस्तावेज और अकाउंट जिनका जिक्र किया जा रहा है, वे कहां से मिले? िजन लोगों के यहां से मिले मैंने उनका चेहरा तक कभी नहीं देखा। उनका मुझसे क्या संबंध है। हम पिछली भाजपा सरकार में हुए कई मामलों के खुलासे करने वाले हैं। आने वाले दिनों में भाजपा के दिल-दिमाग में क्या है, सबके सामने होगा। इसीलिए भाजपा केवल ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।

उम्मीदवारों को करोड़ों की रकम भेजने के दस्तावेज
रिकाॅर्डेड बातचीत को लेकर यह दावा भी किया गया है कि यह आयकर विभाग के पास मौजूद दस्तावेजों पर आधारित है। यह  इसके साथ ही लोकसभा चुनाव के दौरान उम्मीदवारों को करोड़ों की रकम भेजने के सबूत भी दस्तावेजों में हैं। खबर जारी करने वाले निजी टीवी चैनल टाइम्स नाऊ ने मुख्यमंत्री और उनके ओएसडी के बीच हुई बातचीत को ट्वीट भी किया है।

कांग्रेस प्रत्याशियों को करोड़ों भेजे

आयकर विभाग की जांच और उसके दस्तावेजों के आधार मीडिया रिपोर्ट में यह दावा भी किया गया है कि लोकसभा चुनाव में 11 प्रत्याशियों को 25 लाख रुपए से लेकर 50 लाख रुपए तक मोटी रकम भेजी गई। सीबीआई के पास चुनाव आयोग की ओर से डीओपीटी को भेजे गए दस्तावेज पहुंचे हैं, जिनमें यह जिक्र है। जिन लोगों पर अप्रैल 2019 में आयकर छापा पड़ा था, उन्होंने ही इसे जुटाया था। आरके मिगलानी, प्रवीण कक्कड़ और ललित कुमार छजलानी के नामों का उल्लेख दस्तावेजों में है। इसमें आरोप है कि यह पैसा मप्र के उम्मीदवारों के पास आए हैं। इनमें कमलनाथ के पांच करीबी सहयोगी हैं। डायरी में एकाउंट और बयानों के साथ वाॅट्सएप चैटिंग के आधार पर पैसे के ट्रांसफर को पकड़ा गया है।
जांच रिपोर्ट का हवाला देकर यह भी कहा गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह इस सूची में शीर्ष पर हैं। जिन्हें चुनाव का फंड मिला है जो करीब 90 लाख रुपए है। जिन प्रत्याशियों के पास पैसा पहुंचने की बात कही गई है, उनमें मीनाक्षी नटराजन, कमल मरावी, अजय सिंह, प्रमिला सिंह, देवाशीष जरारिया, शैलेंद्र दीवान, कविता सिंह व प्रताप सिंह लोधी शामिल हैं। इन सभी ने हालांकि मीडिया रिपोर्ट के हवाले से आई जानकारी पर या तो टिप्पणी नहीं की या फिर इसे गलत बताया। मिगलानी का भी कहना है कि रिपोर्ट में किनके नाम हैं मैं उन्हें नहीं जानता।
आयकर दस्तावेजों में अलग-अलग विभागों से आए फंड का भी उल्लेख है। परिवहन से 54.45 करोड़, आबकारी से 36.62 करोड़, माइनिंग से 5.50 करोड़, पीडब्ल्यूडी से 5.20 करोड़ और सिंचाई विभाग से 4 करोड़ रुपए कलेक्शन किया गया। चेलानी की तरफ से एआईसीसी को 17 करोड़ रुपए भेजे जाने का भी उल्लेख मीडिया रिपोर्ट्स में किया गया है। चेलानी के कंप्यूटर से जानकारी सामने आई है। 
कथित बातचीत के अंश

सीएम- जो मैंने कहा था कि भेज दीजिए इसको...या दिल्ली वाले को...हां, क्या नाम था प्रकाश?...वो अभी भेजा नहीं आपने।
ओएसडी- सर, प्रकाश से बात हो गई थी हिमांशु की। तो बोल रहा था कि मैं ले जाऊंगा।

सीएम- लेकिन तीन दिन में हिमांशु को भेजा नहीं आपने?
ओएसडी- नहीं सर, अभी हिमांशु के पास ही पड़ा है। अभी ट्रांसफर रुका है तो...आज चला जाएगा। सोमवार को। बाकी कल हिमांशु की प्रकाश से बात हो गई थी। प्रकाश ने कल के लिए बोला। अभी हिमांशु से बात हुई। उसने बोला..1.30 बजे प्रकाश आ रहे हैं।

सीएम- आप भेज दीजिए हिमांशु को।
ओएसडी- कल 10 भेजू या 5 भेजूं।

सीएम - 10 भेज दीजिए।
ओएसडी - ठीक है सर, कल 10 भेज देता हूं। 

सीएम - अभी तो पिछले 5-7 दिनों में तो नहीं भेजना न? हिमांशु को कुछ कहा
ओएसडी - नहीं सर, पिछले 10-12 दिन पहले मैंने भेजा है। 

सीएम - ठीक है, कल हिमांशु को बोलना तुम्हें लेटेस्ट स्टेटमेंट भेज दे।
ओएसडी - दूसरी बात हुई मोहित से, जेवी वाले डिपार्टमेंट का है कोई...वो वाला भी दो दिन में आ जाएगा। मोहित से बात हुई थी कि कल करवा दूंगा। हिमांशु का नंबर भेज रहा हूं।
सीएम - ठीक है।

ओएसडी - कल कुछ स्टेटमेंट भेज रहे हो। 
सीएम - हिमांशु वाला, करेक्ट..
सीएम - प्रवीण मैं सौरभ के साथ बैठा हूं जो कटनी से विधायक थे। कह रहे हैं कि माइनिंग वाले और ट्रांसपोर्ट वाले बीजेपी की मदद कर रहे हैं। मैंने सौरभ को कहा है कि वो नाम दे देगा, जिन्हें आपको टाइट करना है।
ओएसडी - बिलकुल सर।

सीएम - ये माइनिंग और ट्रांसपोर्ट वाले को कह दो कि अगर चुनाव वहां से हारेंगे तो आप अपना बोरिया बिस्तर बांध लेना?
ओएसडी - बिलकुल सौ फीसदी सर।

सीएम - कटनी में एेसा नहीं चलेगा। सौरभ से कहूंगा कि वो तुम्हें कोआर्डिनेट कर ले...इतना कह देना कि माइनिंग-ट्रांसपोर्ट के कारण हारते हैं। रिजल्ट लेकर आएं नहीं तो सामान पैक कर लें।
ओएसडी - मैसेज डाल दिया है कि 8 हुए हैं सर, उसके पास उतना ही है, बाकी हवाले वाले 2-3 दिनों से बंद हैं। अपने पास नेवेन्यू कंपनी का रेड्डी साब की तरफ से जो आएगा, जैसे भेजेंगे करा देंगें। आठ का आज करा देंगे।

गाजियाबाद में कमलनाथ के बेटे को हॉस्टल बनाने के लिए दी गई जमीन का आवंटन रद्द

कमलनाथ के बेटे नकुल की संस्था इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी (आईएमटी) को गाजियाबाद में हॉस्टल के लिए दी गई 10 हजार 841 वर्ग मीटर जमीन का आवंटन रद्द कर दिया गया है। नकुल संस्था के अध्यक्ष हैं। गाजियाबाद के भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी ने राजनगर सेक्टर 20 में आईएमटी परिसर के अंदर जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया था। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष कंचन वर्मा ने जांच समिति के फैसले पर मुहर लगाकर आवंटन रद्द किया। साथ ही प्रवर्तन अनुभाग को जमीन का कब्जा वापस लेने और हॉस्टल को तोड़ने के निर्देश जारी किए। मंगलवार को इस बारे में आईएमटी प्रबंधन को नोटिस जारी कर दिया गया।गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के सचिव, संतोष कुमार पांडेय ने कहा- "आईएमटी गाजियाबाद द्वारा किए गए अवैध निर्माण की जांच के बाद कुल 11 हजार 503 वर्ग फुट जमीन का आवंटन निरस्त कर दिया गया है। इस जमीन पर किया गया अवैध निर्माण हटाने के लिए आईएमटी प्रबंधन को 15 दिन का समय दिया गया है। यदि इस अवधि में उसने अवैध निर्माण खुद नहीं तोड़ा तो प्रशासन कार्रवाई कर इसे जमीदोज करेगा।"

Thursday, May 16, 2019

Полковника Захарченко потребовали посадить на 15,5 лет. У него нашли 8,5 млрд рублей наличными

Прокуратура попросила приговорить полковника Дмитрия Захарченко к 15,5 годам колонии строгого режима и штрафу в 494 млн рублей по обвинению в получении взяток. Захарченко - бывший сотрудник управления "Т" антикоррупционного главка МВД, во время задержания у него были найдены 8,5 миллиарда рублей наличными деньгами.

В зале суда присутствовали пять адвокатов Захарченко. Перед началом заседания они долго разговаривали с полковником, находящемся в "аквариуме". Один из адвокатов говорил Захарченко, что готовит жалобы в Европейский суд по правам человека.

"Где же победа?" - спросил Захарченко. "Вот документы, они обеспечат победу", - ответил ему адвокат.

"Хотя все для победы у нас есть. Вот журналисты сидят, они разве правду напишут?" - стал обращаться к залу Захарченко.

После этого он почему-то заговорил о деле футболистов Кокорина и Мамаева. "Надеюсь, Мамаев будет играть в Ростове. Передайте им мою поддержку", - сказал Захарченко журналистам.

В свою очередь прокурор Милана Дигаева, обращаясь к судье, заявила, что обвинения, выдвинутые в адрес Захарченко, нашли свое объективное подтверждение.

"Получение взятки считается одним из самых опасных должностных преступлений, так как дискредитирует и подрывает авторитет государства в глазах населения, - говорила обвинитель. - Захарченко, который должен был бороться с коррупцией, на деле занимался противоположным и в личных интересах имитировал эту борьбу".

Во время своего выступления прокурор зачитывала показания одного из свидетелей, который рассказывал, как Захарченко якобы вымогал у него взятку. В это время Захарченко обратился к судебному приставу и указал на служебную собаку, которая легла на пол. "Устала это слушать", - сказал Захарченко.

В итоге представитель прокуратур попросила приговорить Захарченко к реальным тюремным срокам по нескольким пунктам обвинения. Общий срок заключения, по мнению прокуратуры, путем частичного сложения наказаний должен составить 15,5 лет.

После заседания Захарченко заявил, что прокурор якобы искажала слова свидетелей и вырывала куски их речи во время чтения их показаний. "Даже собака высказывала своё возмущение", - считает он. Обвинение Захарченко назвал голословным.

Также бывший полицейский утверждает, что ему предлагали дать признательные показания и получить шесть-восемь лет колонии, но он отказался. Ни следствие, ни прокуратура это заявление Захарченко пока не прокомментировали.

Дмитрий Захарченко находится под арестом с сентября 2016 года, его обвиняют в получении взяток и препятствовании осуществления правосудию.

Во время задержания у Захарченко дома было обнаружено 8,5 млрд рублей наличными. Также выяснилось, что он владеет 13 квартирами в Москве, 14 машино-местами и четырьмя дорогостоящими автомобилями.

Захарченко говорил, что это имущество заработали его отец и сестра, занимаясь строительством и сельским хозяйством. Защита Захарченко утверждает, что найденные при обыске деньги подкинули.

Прокуратура рассказала в суде, что при обыске также была найдена школьная тетрадь, в которой мать Захарченко якобы вела учет средств, которые хранились в квартире.

Обыски также прошли и у сестры Полковника. У нее дома были найдены 124 миллиона долларов, 1,4 миллиона евро, 342 миллиона рублей и золотой слиток весом 500 граммов.

В августе 2018 года деньги Захарченко были изъяты в пользу государства.

В апреле 2019 года отца полицейского Виктора Захарченко приговорили к четырем годам колонии общего режима и штрафу в 800 тысяч рублей за растрату средств банка "Московское ипотечное агентство" (МИА).

Отца Захарченко обвинили в том, что он фиктивно работал в банке МИА на должности вице-президента и получал зарплату в размере 150 тысяч рублей в месяц. Общая сумма растраты, по версии следствия, составила 4,5 миллиона рублей. Ущерб Захарченко возместил.

Friday, May 3, 2019

Unerwarteter Ärger mit dem Eigenheim

Krach um 600 000 Franken Anschlussgebühren nach BaZ-Recherchen beigelegt – Therwil will Reglement revidieren

Therwil. Es geht um viel Geld, ungenaue Verträge, Reglemente, die willkürlich wirken und am Rande auch um die umstrittene Scientology-Kirche.

Zunächst begann alles in Minne. Die Firma Swiss Immo Trust baute von 2013 bis 2014 an guter Lage in Therwil die schmucke Überbauung Untere Mühle mit 26 Eigentumswohnungen. Doch die Freude an den Eigentumswohnungen verging den Bewohnern in den letzten sechs Monaten – nicht aufgrund der Wohnungen an sich, sondern weil plötzlich Forderungen von insgesamt 600 000 Franken im Raum stehen, mit denen die Stockwerkeigentümer nicht gerechnet haben und die für einige von ihnen kaum aufzubringen sind.

Hickhack um Zahlung
Bei dem Betrag handelt es sich um die Anschlussgebühren an die Kanalisation und Wasserversorgung der Gemeinde Therwil. Für die Stockwerkeigentümer ist klar: Diese Gebühren muss der ehemalige Bauherr Swiss Immo Trust bezahlen, denn die Eigentumswohnungen wurden im Zustand «schlüsselfertig» oder «wie besichtigt» verkauft, was auch ein funktionsfähiges Kanalisationssystem mit einschliesse. Eine Einschätzung, die auf Anfrage der BaZ auch der Advokat und Vizepräsident des Hauseigentümerverbandes Baselland, Alexander Heinzelmann, teilt: «Falls nichts Gegenteiliges im Vertrag oder in zusätzlichen, integrierten Vereinbarungen steht, dürfen die Käufer davon ausgehen, dass die Anschlussgebüren im Kaufpreis inbegriffen sind.»

Die Swiss Immo Trust machte jedoch monatelang keine konkreten Anstalten, die Rechnung der Gemeinde zu übernehmen. Glaubt man Simon von Fürstenhaus*, einem der Eigentümer, macht die Firma im Gegenteil Druck: «Zunächst sagten sie uns, dass sie nicht zahlen. Später hiess es dann, dass sie für einen Deal bereit sind, wenn wir auf unseren Anwalt verzichten. Und zu guter Letzt sind sie zu mir nach Hause gekommen und haben mir angeboten, die Gebühren zu übernehmen, falls ich ihnen ein Darlehen von 200 000 bis 350 000 Franken gebe», sagt von Fürstenhaus.

Die Namen, die von Fürstenhaus in diesem Zusammenhang nennt, sind keine Unbekannten und mit der Scientology-Kirche Basel verbunden. Auch die Swiss Immo Trust taucht auf einer Beobachter-Liste der von aktiven Scientologen geführten Firmen auf. Dies, weil der frühere Verwaltungsrat der Swiss Immo Trust, Rudolf Flösser, leitender Direktor bei Scientology Basel ist. Seine Firma, die Dr. Flösser Treuhand GmbH, hat für das Projekt Untere Mühle auch die Bauherrenberatung übernommen.

«Ich habe an sich nichts gegen Scientology», sagt von Fürstenhaus, der eine Hexenjagd gegen Scientology vermeiden will. Das Verhalten der Swiss Immo Trust in den letzten Monaten findet er trotzdem nicht okay und hat sich deshalb an die BaZ gewandt. Mit Erfolg: Was lange nicht möglich schien, war nach einer Anfrage der BaZ innerhalb eines Tages machbar – die Stockwerkeigentümer haben die schriftliche Bestätigung erhalten, dass Swiss Immo Trust die Gebühren übernimmt.

Christian Varga, Verwaltungsrat der Swiss Immo Trust, bestreitet, dass er die Übernahme der Gebühren je mit der Verleihung eines Darlehens verknüpft hat. Obwohl die Swiss Immo Trust die Gebühren nun übernimmt, ist er nach wie vor der Meinung, dass diese im Preis der Wohnung nicht mit eingeschlossen waren: «Die Kanalisations- und Anschlussbeiträge waren gemäss Vertrag von den Käufern zu tragen. Da jedoch üblicherweise die Kanalisations- und Anschlussbeiträge im Kaufpreis inbegriffen sind, haben wir uns aus Kulanzgründen bereit erklärt, diese Kosten zu übernehmen.» Dies habe er den Käufern im Februar mündlich mitgeteilt: «Wir hätten dies damals schriftlich machen können statt lediglich mündlich, um Klarheit zu schaffen», erklärte Varga.

Unangenehme Situationen
Was Simon von Fürstenhaus fast noch mehr ärgert als das Verhalten von Swiss Immo Trust, ist, dass die Gemeinde die Rechnung, in Kenntnis der Fakten, trotzdem an die Stockwerkeigentümer senden wollte. «Nur aufgrund eines willkürlichen Gummi-Reglements konnte es überhaupt zu dieser unangenehmen Situation kommen.» Das Abwasserreglement der Gemeinde besagt, dass bei Neubauten das Datum der Endschätzung des Gebäudes durch die kantonale Gebäudeversicherung Stichdatum für die Beitragspflicht ist. Auf den Termin der Schätzung haben Gemeinde, Verkäufer und Käufer kaum Einfluss. Im Fall der Unteren Mühle führte dieses Stichdatum dazu, dass die Rechnung trotz schlüsselfertigem Kauf an die Stockwerkeigentümer ging.

«Dieses Reglement ist veraltet, das muss auch die Gemeinde sehen. Sie hätte sich in dieser Angelegenheit auf unsere Seite stellen müssen», sagt von Fürstenhaus enttäuscht.

Laut Gemeindeverwalter Theo Kim muss die Gemeinde die Rechnung dem zum Zeitpunkt der Rechnungsstellung im Grundbuch eingetragenen Eigentümer stellen – ausser der Verkäufer bestätigt der Gemeinde, dass er die Kosten übernimmt, was im Fall von Swiss Immo Trust bisher offenbar nicht der Fall war. Die Schwächen des 25-jährigen Reglements, das ähnlich auch in vielen anderen Gemeinden in Kraft ist, sieht er jedoch auch: «Wir haben bemerkt, dass es in Einzelfällen zu verzwickten und unangenehmen Situationen führen kann.

Es gab auch einen Fall, bei dem Käufer tatsächlich zweimal bezahlen mussten», sagt Kim. Deshalb soll das Reglement noch dieses Jahr revidiert und vor die Gemeindeversammlung gebracht werden: «Darin ist vorgesehen, dass die Rechnung zu einem früheren Zeitpunkt erfolgt, zu dem der Verkäufer im Normalfall noch der Besitzer ist.» Einen Fall wie jenen der Unteren Mühle gäbe es dann nicht mehr.

中国赴俄医疗专家组与俄罗斯医生分享抗疫经验

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