कटनी से पकड़ी गई आदमखोर बाघिन को लेकर वन विहार नेशनल पार्क की टीम देर रात भोपाल पहुंच गई। इस बीच बाघिन को खाने में चिकन और इलेक्ट्रॉल युक्त पानी दिया गया। बाघिन के तनाव को देखते हुए कई जगह हाल्ट भी लिया गया। इस दौरान कभी बाघिन शांत रही तो कई बार दहाड़कर गुस्सा जताया। वन विहार नेशनल पार्क की डायरेक्टर समीता राजौरा नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम बाघिन को लेकर बुधवार दोपहर में बांधवगढ़ नेशनल पार्क से रवाना हुई थी।
वन विहार प्रबंधन बाघिन मटक्कली के व्यवहार से अवगत था। इसलिए एनक्लोजर में छोड़ने से पहले बांधव और नई बाघिन के बीच पार्टीशन किया गया है दोनों एक दूसरे को देख न सके। राजौरा ने बताया कि दोनों ही वाइल्ड टाइगर हैं। एक दूसरे को देखकर खुद को घायल कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि मटक्कली को बाघ पन्ना और कान्हा के बीच रखा गया था तो वह डर कर पेड़ पर चढ़ गई थी।
भोपाल फाॅरेस्ट सर्किल की 608 बीटों में बाघों की गणना : भोपाल फाॅरेस्ट सर्किल की 608 बीटों में बाघों की गणना हुई है। इसमें 158 बीटों में बाघों का मूवमेंट हुआ है। वन विभाग द्वारा जारी किए रुझान में एक और बात सामने आई है। इस दौरान बाघ ऐसे इलाकों में दिखाई दिया है जहां कभी उसका अस्तित्व ही नहीं हुआ करता था। इसमें प्रेमपुरा, समरधा, आमला, भानपुर, वीरपुर जैसे बीट शामिल हैं।
इन उपायों से बढ़ा बाघों का मूवमेंट एरिया : भोपाल फाॅरेस्ट सर्किल के चीफ कंजरवेटर एसपी तिवारी का कहना है कि बाघों की सुरक्षा के लिए कई तरह के प्रयास किए गए हैं, इसी वजह से बाघों के मूवमेंट का इलाका बढ़ा है। रातापानी सेंचुरी में दांतखो गांव को विस्थापित किया गया है। यहां शाकाहारी वन्य प्राणियों के लिए चारागाह भी तैयार किया जा रहा है।
इसके अलावा केरवा से ओंकारेश्वर तक बाघों के लिए काॅरिडोर तैयार किया जा रहा है। बाघों द्वारा किए गए शिकार पर ग्रामीणों को मुआवजा दिया जा रहा है। यह राशि बढ़ा दी गई है। उन्होंने बताया कि मिंडोरा की पहाड़ी खाली थी। यहां पर प्लांटेशन कर बाघ के अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। बाघों के पानी पीने के लिए सॉसर बनाए गए हैं। इन्हीं जगहों पर लगाए गए ट्रैप कैमरे में चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली सुअर सहित अन्य वन्यप्राणियों ने उपस्थिति दर्ज कराई है।
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